देवर्षि नारद जयंती

प्रतिवर्ष वैशाख कृष्ण प्रतिपदा यह दिन नारद जयंती के रुपमे मनाया जाता है | देवर्षि नारद भक्त श्रेष्ठ थे , परम भागवत भक्त यह भी उनकी पहचान है | स्वाभाविक रूप से वे आद्य कीर्तनकार के रूप मे जाने भी जाते है | उन्हिसे नारदीय कीर्तन की प्रथा प्रारंभ हुयी और आज भी  प्रचिलित है | देवर्षि नारद के जीवन का अभ्यास करे तो हमें ज्ञात होता है की वे एक उत्तम सवान्दक भी रहे है , सामने वाला छोटा हो या बड़ा वो हमेशा सीधी बात करते थे और समाजहित की बात करते थे , इसीलिए वे  प्रथम पत्रकार थे | आजकी पत्रकारिता के संदर्भमे देखे तो वे  सम्वाद के माध्यम से लोगोंको सलाह , उपदेश देते थे | इसी कारण नारद जयंती का दिन “ पत्रकार दिन ” के रुपमे मानने की प्रथा अब सर्वत्र प्रचलित है | अनेक जगह अंपनी सुविधानुसार इस तिथि की नजदीकी समय देखकर यह कार्यक्रम सम्पन्न होते है | विशेषत : उत्तर भारत मे या पर्व आपनी गरिमा के साथ पत्रकार जगत मे पहेचान बना चूका है |

नागपुर मे विश्व संवाद केंद्र द्वारा गत ८ वर्षोंसे यह पत्रकार दिन मनाया जा रहा है | इस उपलक्ष मे किसी जेष्ठ पत्रकार बन्धु को मार्गदर्शन हेतु आमंत्रित किया जाता है | नागपुर विदर्भ क्षेत्र के जेष्ठ संपादक को अध्यक्ष के रूप मे मनोनीत किया जाता है | इस कार्यक्रम मे दो पत्रकार बंधुओ को  सन्मानित किया जाता है | इस वर्ष २८ मई को यह कायर्क्रम निश्चित किया गया है | रामनगर चौक स्थित डॉ हेडगेवार रक्तपेढ़ी के स्व लक्ष्मणराव भिड़े सभागृह मे सुबह ११ बजे यह कार्यक्रम संपन्न होगा | इस कार्यक्रम मे “ झी न्यूज ” के मुख्य संपादक श्री रोहित सरदाना मुख्य अतिथी होंगे तथा दैनिक लोकशाही वार्ता के मुख्य संपादक श्री. ल.त्र . जोशी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे |

इस वर्ष का जेष्ट पत्रकार पुरस्कार “ झी २४ तास ” नागपुर के ब्यूरो प्रमुख श्री अखिलेश हलवे इन्हें दिया जायेगा तथा युवा पत्रकार पुरस्कार वाशिम स्थित लोकशाही वार्ता के जिल्हा प्रतिनिधि श्री नितिन पगार इन्हें प्रदान किया जायेगा | एक नए पुरस्कार की घोषणा इस वर्ष से हुई है , छाया चित्रकार या  व्यंग चित्रकार या सोशल मिडिया मे सकारात्मक सोच के साथ कार्य करनेवाले पत्रकार को अब यह तीसरा पुरस्कार दिया जायेगा | इस वर्ष यह पुरस्कार नागपुर स्थित इंडियन एक्सप्रेस की फोटोग्राफर सुश्री मोनिका चतुर्वेदी इन्हें प्रदान किया जायेगा |

देवर्षि नारद जैसे पौराणिक पत्रकारीता की  आज के इस कालमे भी  अत्यंत आवश्यकता है , उसकी आजभी प्रासंगिकता है क्यों की वे जीवनभर देशके  हित मे , समाज कल्याण के लिये कार्यरत थे | उन्होंने कभी भी अपने सामने खड़े व्यक्ति चाहे वो छोटा हो या प्रत्यक्ष कोई देवगण या कोई बलशाली राक्षस हो बिना हिचकिचाहट , किसीके भय का विचार न करते हुए अपनी बात स्पष्टता के साथ रखी | इसे वो अपना उत्तरदायित्व मानते थे | इसी कर्तव्य के चलते उनका त्रिलोक मे अखंड संचार था | वे हर किसी को मिलते जो  उन्हें याद करता |‘ नारायण नारायण ’ यह शब्द उनकी पहचान था | उनकी  संवाद काला अद्भुत थी , बड़े बड़े राजा महाराजा, इन्द्रादि देवता , भयंकर राक्षस तथा पृथ्वी के सामान्य जनता तक उनका परिचय था | और वही प्रश्न , कठिनाइया , यही समाज कल्याण की बाते , न्यूज वह उन तक पहुंचाते जहा उनका निराकरण हो सके | उन्हें प्रवेश नहीं ऐसि एकभी जगह सारे ब्रम्हांड मे नहीं थी | वे देवर्षि इस विशेषण से परिचित है | वे सारे त्रिलोक मे वन्दनीय , पूजनीय तथा परमभगवद भक्त थे | परमेश्वर की भक्ति की प्रेमधरा का प्रवाह सारे जगत मे उन्ही के कारण बहता रहा है | पत्रकारोंके वे आद्य पत्रकार थे | समाचार पत्रों की प्रारंभ काल मे कोलकोता से प्रकाशित समाचार पत्रिका ‘ उदित मार्तंड ’ ने उस समय उन्हें ‘ आद्य पत्रकार देवर्षि नारद ’ इस संबोधन से सन्मानित किया जो वास्तविक और प्रासंगिक भी है |

पौराणिक कथाओ मे देवर्षि की भूमिका पर संदेह हो सकता है , जैसे कृष्णपत्नी सत्यभामा के आंगन मे बढ़ा पारिजातक वृक्ष अपने सुन्दर फुल बगल के अन्य रानी के आंगन मे गिराता, यह बात बताने वाले नारद जी हे थे | झगडा लगाते मगर उनका उद्देश्य कोई और ही लोककल्याण था यह भी बाद मे मालूम पड़ता है | देवर्षि एक राष्ट्रहितेषी चिन्तक थे | हम पत्रकार भी अपने जीवन मे कुछ आदर्श लेकर  चलते है | क्या हम कभी राष्ट्र का ‘ अहित ’ करनेवाले समाचार प्रसारित करंगे ? क्या कभी देश की सुरक्षा सम्बन्धी गोपनीय वार्ताये देंगे ? इन प्रश्नोका उत्तर हमें अपने अंतर्मन को देना होगा | अब समाज जागृत है |

कुछ वर्ष पूर्व मा चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री थे | उस समय देश की आर्थिक स्थिति कठिन हो गयी थी | आंतर राष्टीय मुद्रा निधि का  प्रचंड अभाव हो गया था | ऐसे मे देश की सुवर्ण मुद्रा का भंडार ‘ बैंक ऑफ़ इंग्लॅण्ड मे गिरवी रखने का फैसला लिया गया था | यह सुवर्ण भंडार नागपुर स्थित रिजर्व बैंक मे सुरक्षित था | उसके स्थानांतरण के पूर्व रात मे नागपुर के पोलिस आयुक्त ने नागपुर के सभी जेष्ठ संपादको को बुलाया , साथ मे रिजर्व बैंक के प्रमुख अधिकारी भी मौजूद थे | आयुक्त ने सरकारके इस निर्णय की जानकारी सभी को दी, और कहा देश हित मे यह जानकारी आप लोग गोपनीय रखे , सुवर्णभंडार का स्थानांतरण होने के बाद ही इस समाचार को प्रसारित करे  | सभी ने इस सूचना का पालन किया | राष्ट्र सुरक्षा , राष्ट्र हित मे बात करना यही हम पत्रकारों की भी प्राथमिकता होनीही चाहिये | यह भी नारदीय संस्कारो का अविर्भाव है |

देवर्षि की प्रचंड लोककल्याण कारी भूमिका के बावजूद उन्हें ‘ झगडा लगानेवाला ’ इसी भुमका मे सामान्यत : समझा गया है | मुझे लगता है इसके पीछे हमारा फिलिमी जगत है | बहुतांश पौराणिक फिल्मो मे नारद की भूमिका ‘जीवन ’ इस कलाकार ने की , इसके साथ उनकी खलनायक की भूमिकाये भी लोकप्रिय हुयी | शायद इसी वजह से नारदमुनी की लोकप्रिय छबी धूमिल हुयी | देवर्षि नारद के जीवन का अभ्यास करे तो यह पाया जाता है की वह प्रकांड विद्वान् , श्रेष्ठ संवादक , तथा जेष्ठ पत्रकार भी थे | वे अनूठे भगवद भक्त थे | महाभारत का लेखन करने के बाद वेद व्यासजी का मन संतप्त हो गया , अस्वस्थ हुये व्यास के कुटी मे देवर्षि नारद पधारे और उन्होंने वेद व्यासजी को श्रीकृष्ण की बाल लीलाये लिखने की प्रेरणा दि और भागवद ग्रन्थ का अवतरण हुवा | वैसे ही शतको पहेले महर्षि वाल्मीकि को भगवान श्रीराम का चरित्र लिखने की प्रेरणा देवर्षि ने दि और रामायण ग्रन्थ का अवतरण पृथिवी पर हुवा | उनका स्मरण याने आद्य पत्रकार का स्मरण है |अत : उस महान प्रथम पत्रकारिताके जनक को वंदन करते हुये आजका पत्रकार दिन संपन्न करे |

 

— सुधीर पाठक , नागपुर